दिव्यांग रामजी समाज के बच्चों को दे रहे निशुल्क शिक्षा

बगहा।आज52वांविश्वसाक्षरतादिवसमनायाजारहाहै।गौरतलबहैकिवर्ष1966सेहरसाल8सितंबरकोविश्वसाक्षरतादिवसमनायाजाताहै।पूराविश्वव्यक्ति,समाजऔरसमुदायकाध्यानसाक्षरताकेमहत्वकीओरलानेकेलिएइसदिनकोमनाताहै।शिक्षाव्यक्तिकेसंपूर्णविकासमेंअहमभूमिकाअदाकरतीहै।शिक्षाहीदेशकेसामाजिक-आर्थिकविकासकाआधारहोतीहै।किसीभीदेशकाशैक्षणिक²ष्टिसेमजबूतहोनाउसेविकासकीऊंचाइयोंपरलेजासकताहै।विकसितऔरवैश्विकशक्तिबनेदेशोंकेविकासमेंशिक्षाकेक्षेत्रमेंहुएअछ्वुतविकासकाअहमयोगदानशामिलहै।इसक्षेत्रकोनजरअंदाजकरनाकिसीभीव्यक्तिऔरअंतत:देशकोकमजोरकरसकताहै।सरकारनेसभीकोसाक्षरकरनेकेलिएभारतमिशनयोजनाचलाई।इसकेतहतपढ़े-लिखेबेरोजगारयुवाओंकोसंविदाकेआधारपरप्रेरककेरूपमेंनौकरीपररखा।येप्रेरकउम्रदराजअशिक्षितलोगोंकोचिन्हितकरउन्हेंसाक्षरकरनेकाकामकरतेरहे।लेकिनबीतेदोसालसेइन्हेंसेवासेवंचितकरदियागया।जिससेक्षेत्रकेअनपढ़प्रौढ़ोंकोसाक्षरबननेकीदिशामेंएकउम्मीदभीटूटतीनजरआरहीहै।कभीनक्सलप्रभावितइलाकेकेरूपमेंथीपहचान,आजशिक्षाकाकेंद्रबनाथरुहटकिसीसमयमेंथरुहटक्षेत्रनक्सलप्रभावितक्षेत्रकेरुपमेंजानाजाताथा।यहांसाक्षरतादरकाफीकमहुआकरतीथी।निरक्षताकेबड़ेपैमानेपरहोनेकाकारणलोगोंकेबीचजागरूकताकानहोना,गरीबीऔरशिक्षाकारोजगारपरकनहोना।साक्षरताबढ़ानेकेलिएसरकारनेतरहतरहकेप्रयासकिए।जिसमेंलोगोंकेबीचजागरूकताकेसाथउनकोप्रोत्साहनदेनाहोयागरीबीकीसमस्याकोदेखतेहुएएकबड़ीआबादीकोपरिवारकेभरण-पोषणकेलिएकामसेजोड़नेकाकामहो।सरकारनेनक्सलपरअंकुशलगायाऔरलोगोंकोरोजगारजोड़नेकाकामकिया।फिरनिरक्षरोंकोसाक्षरबनानेकेलिएएकमुहिमकीशुरुआतहुई।इसमुहिमकानामसाक्षरभारतहै।जिसकेतहतनिरक्षरमहिलाओंऔरपुरुषोंकोसाक्षरबनानेकाकार्यशुरूहै।आजउसीकीदेनहैकिथरुहटक्षेत्रकेअधिकतरलोगसाक्षरबनपाएहैं।आजथरुहटकीराजधानीकहेजानेवालीहरनाटांड़शिक्षाकेहबकेरूपमेंजानीजातीहै।वहींदूसरीओरबीतेएकदशकमेंथरुहटक्षेत्रकाशिक्षाकास्तरकाफीबढ़ाहै।यहांलड़कोंकीअपेक्षालड़कियोंकीशिक्षाकाप्रतिशतभीखुबबढ़ाहै।पोशाक,छात्रवृत्तिऔरसाईकलयोजनाभीइसमेंसहायकसाबितहुईहै।यहींकारणहैकिलड़कोंकीअपेक्षालड़कियोंकाशिक्षाअनुपातशून्यसेशिखरतकपहुंचाहै।जहांपहलेगांवकीबेटियांघरकीदहलीजलांघनेसेभीकतरातीथीं।वहींआजबाहरप्रदेशोंमेंजाकरशिक्षाकाअलखजगारहीहैं।निर्धनवअसहायबच्चोंकोसाक्षरबनानेकेउद्देश्यसेदेतेहैंनिश्शुल्कशिक्षा:स्वामीविवेकानंदकेध्येयवाक्ययदिबच्चेविद्यालयतकनहींपहुंचपातेतोविद्यालयकोबच्चोंतकपहुंचनाहोगा।इसकोआधारमानतेहुएहरनाटांड़केबैरियाकलागांवनिवासीदिव्यांगरामजीमहतोनेगांवकेगरीबवअसहायबच्चोंकोनसिर्फसाक्षरबनानेकीठानीबल्किउन्हेंप्राइमरीकीबेहतरशिक्षादेनीशुरूकरदी।उन्होंनेवनवर्तीएवंसुदूरगांवोंमेंकामकरतेहुएगरीबीवअशिक्षाकोनजदीकसेदेखाथा।इसलिएवेबच्चोंकोनिश्शुल्कशिक्षादानदेनेमेंजुटगए।आजभीउनकीपाठशालामेंसैकड़ोंनिर्धनवअसहायबच्चेपठानपाठनकरनेपहुंचतेहैं।वहींदूसरीओरमहुअवाकटहरवापंचायतकेजीवनलालपटवारीभीशिक्षाकाअलखजगाकरनिश्शुल्कशिक्षादानदेरहेहैं।जीवनलालबतातेहैंकिसभीजानतेहैंनिरक्षरताएकअभिशापहै।यहगरीबी,बीमारी,बदहालीकाएकबड़ाकारकहै।इसकेकारणअंधविश्वास,पिछड़ापनआदिकाबढ़ावामिलताहै।समाजमेंकईतरहकीरूढि़यों,असमानताओं,लिगभेद,ठगीतथाशिक्षाकेप्रतिउदासीनतामेंनिरक्षरताकेकारणएकबड़ीआबादीविकासकेलाभसेवंचितरहजातीहैजिससेसमाजपिछड़ापनऔरबदहालीसेबाहरनहींनिकलपाता।यहीकारणहैकिमैंनेलड़कियोंकीशिक्षाकोबेहतरबनानेकेलिएउन्हेंनिश्शुल्कशिक्षादेनेकाप्रयासकियाहै।