ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने का अवसर

जागरणसंवाददाता,कोडरमा:कोरोनासंक्रमणकोलेकरलॉकडाउनकेबाददौरग्रामीणअर्थव्यवस्थाकोगतिदेनेकामौकासरकारवजिलाप्रशासनकेपासहोगा।यहयुवाओंकेपलायनकोरोकनेऔरइनकीश्रमशक्तिकोग्रामीणअर्थव्यवस्थाकोमजबूतीदेनेकाभीएकअवसरहोगा।लॉकडाउनकेबादकामगारोंकीएकबड़ीआबादीमहानगरोंसेजीवनकाएककटुअनुभवलेकरलौटीहै।इन्हेंगांवोंमेरोकनेकेलिएइनकेलिएरोजगारकेअवसरसृजितकरनेहोंगे।कृषि,पशुपालनकेसाथइसपरआधारितलघुएवंकुटीरउद्योगकोप्रोत्साहितकरनेकायहबेहतरमौकाहै।इससेशहरोंपरआबादीकेबोझकोभीकाफीहदतककमकियाजासकताहै।वैसेभीयहतबकामहानगरोंमेंबहुतअच्छेहालातमेंनहींहै।खुलीहवासेदूरतंगकमरोंमेंइनकीजिदगीवहांमशीनकीभांतिचलतीहै।लॉकडानकेबादशहरोंमेंऔद्योगिकक्षेत्रकेहालतभीनाजुकहोगी,ऐसेमेंइनकेलिएरोजगारकेअवसरभीसीमितहोंगे।ऐसेमेंसरकारोंकेलिएभीयहमौकाहैकिग्रामीणक्षेत्रमेंखाद्यसामग्रीकाउत्पादनबढ़ानेकेसाथइसकीपैकेंजिगवप्रसंस्करणजैसेछोटेउद्योगकोविकसितकरें,ताकिइसश्रमशक्तिकोनियोजितकियाजासके।वर्तमानमेंसमयमेंमनरेगायोजनाकेफेलहोनेकेपीछेएकबड़ीवजहग्रामीणक्षेत्रसेयुवाओंकापलायनथा।कृषिकार्यकेलिएमजदूरनहींमिलनाबड़ीसमस्याथी।लेकिनअबदोनोंक्षेत्रकेयहबहुतअच्छाअवसरहै।जिलेकेग्रामीणक्षेत्रमेंकार्यकररहेझारखंडसेवासंस्थानकेसचिवमनोजदांगीकहतेहैंकिसरकारकेद्वाराकृषिएवंग्रामीणविकासकेक्षेत्रमेंचलरहीयोजनाएंइससमयमेंकाफीकारगरमाध्यमसाबितहोसकतीहै।कृषिकेक्षेत्रमेंयहांरोजगारकेअसीमितअवसरहैं।इसकेलिएअधिकारियोंकोग्रामीणयुवाओंकेसाथसमन्वयबनाकरकामकरनाहोगा।क्याकहतेहैंअधिकारी

कोडरमा:लॉकडाउनमेंमनरेगावआवासयोजनाकेकार्योंकोशुरूकरनेकेआदेशकेबादइसमेंतेजीआयीहै।जिलेमेंमनरेगाके3700योजनाओंमेंकार्यशुरूकरवादियागयाहै।इसमेंवैसेमजदूरोंसेभीकार्यलेनेकोकहागयाहै,जोदूसरेशहरोंसेलौटकरआयेहैं।इनकेलिएनयेसिरेसेजॉबकार्डबनानेकेसाथ-साथकार्यसेजोड़नेकाआदेशदियागयाहै।कोरोनानेलोगोंकोबड़ीआर्थिकसंकटकीमेंडालदियाहै।ऐसेहालातमेंघरपरहीखुदकेलाभकीयोजनाउनमजदूरोंकेलिएबेहतरसाबितहोगा।मनरेगाकेसाथ-साथआवासयोजनामेंभीदूसरेशहरोंसेलौटेकुशलवअकुशललोगोंकोकार्यसेजोड़नेकोकहागयाहै।व्यक्तिगतलाभकीयोजनापरखासजोरहै।लोगखुदकीभूमिपरडोभा,कूप,टीसीबी,पौधारोपणजैसेकार्यकरसकतेहै।

आलोकत्रिवेदी,डीडीसी,कोडरमा।