सनातन धर्म मनुष्य को बंधनमुक्त करता है : विवेकानंद जी

जागरणसंवाददाता,मोगा:

गीताभवनमेंबुधवारसेशुरूहुएसर्वधर्मसमभावसम्मेलनएवंशिवपुराणकथाकेपहलेदिनवैदिकमंत्रोच्चारणकेसाथशुभारंभहुआ।सुबहकेसमयप्रवचनकरतेहुएहरिद्वारसेपहुंचेस्वामीविवेकानंदजीमहाराजनेबड़ेहीप्रभावशालीढंगसेधर्मकेमर्मकोसमझातेहुएकहाकिसनातनसंस्कृतिमेंधर्मकीव्याख्याबड़ेहीउदारढंगसेकीगईहै,चिताकीबातयेहैकिआजकुछलोगदुराग्रहसेवशीभूतहोकरधर्मकोअपनेढंगसेपरिभाषितकरसमाजकोदिगभ्रमितकरनेकीकोशिशकररहेहैं।करुणा,संवेदना,दयासनातनधर्मकेरूपस्वामीविवेकानंदजीमहाराजनेकहाकिसनातनधर्ममेंधर्मकीव्याख्याजिसउदारढंगसेकीगईहैवहमानवकोमानवबनानेवालीहै।इंसानकोइंसानियतदिखानेवालीहै।उसकेकईस्वरूपहैं।करुणा,दया,संवेदना,उदारता,वात्सल्यताकाव्यवहारसनातनधर्मसेनिकलेहुएहैं।भलेहीयेमनुष्यकेनिजीधर्मकोपरिभाषितकरतेहैं,लेकिनधर्मकाहीस्वरूपहैं।इसीवजहसेहमदूसरोंकेदुखसेदुखीहोतेहैं,हमारेअंदरदयाकाभावजागताहै,मांकेअंदरवात्सल्यकीभावनाहोतीहै।सनातनधर्मकीव्याख्याकेअनुसारधर्मव्यक्तिकोबंधनमुक्तकरताहै,लेकिनआजजोकुछतथाकथितधर्मकेठेकेदारधर्मकोनिजीस्वार्थ,दुराग्रहवशसमझानेकाप्रयासकररहेहैंवहधर्मलोगोंकोबंधनमेंबांधताहै,बंधनमेंजानवरबंधतेहैं,यानिधर्मकेकथितठेकेदारकोधर्मकोआजजिसढंगसेसमझानेकाप्रयासकररहेहैंवहमनुष्यकोमनुष्यताकीतरफनहीं,पशुताकीतरफलेजारहेहैं।

आचार-विचारमेंदिखताहैधर्म

स्वामीविवेकानंदजीमहाराजनेकहाकिआजसनातनधर्मकोसहीरूपमेंसमझनेकीजरूरतहै।धर्मसिर्फपूजाकाहिस्सानहींहै।धर्महमारेआचार,व्यवहारकोप्रदर्शितकरताहै,दूसरोंकेप्रतिसंवेदनाकाभावजगाताहै,दया,करुणाकाभावजगाताहै।सनातनधर्मकेरास्तेपरचलनेवालेव्यक्तिकोसकारात्मकदिशाकीओरलेजाकरमानवकल्याणकेकामआताहै।सुबहसबसेपहलेहरिद्वारसेपहुंचीविद्वानसंतोंकीमंडलीनेवैदिकमंत्रोच्चारणकेसाथपाठकिया।बादमेंनवग्रहनपूजनकेसाथकलशस्थापनाकीगई।बादमें11यजमानोंकीमौजूदगीमें11शिवपुराणस्थापितकिएगए।शहरकेगणमान्यव्यवसायी,उद्यमीयजमानबनेहैंजोप्रतिदिनपरिवारकेसाथशिवपुराणकाविधिविधानकेसाथवाचनकरेंगे।

बुआदत्ताजीकेभजनोंपरझूमेश्रोता

दोपहरबादतीनबजेसेशुरूहुईशिवपुराणकथाकाशुभारंभजम्मूसेपहुंचेस्वामीबुआदत्ताजीमहाराजनेकी।उन्होंनेबतायाकिशिवपुराणकासंबंधशैवमतसेहै।इसपुराणमेंप्रमुखरूपसेशिव-भक्तिऔरशिव-महिमाकाप्रचार-प्रसारकियागयाहै।प्राय:सभीपुराणोंमेंशिवकोत्याग,तपस्या,वात्सल्यतथाकरुणाकीमूर्तिबतायागयाहै।कहागयाहैकिशिवसहजहीप्रसन्नहोजानेवालेएवंमनोवांछितफलदेनेवालेहैं।स्वामीबुआदत्ताजीमहाराजनेअपनेभजनोंसेसभीकोमंत्रमुग्धकरदिया।शिवपुराणकेवैज्ञानिकपहलुओंकोसमझाया

हरिद्वारसेपहुंचेस्वामीवेदांतप्रकाशजीमहाराजनेशिवपुराणकथाकेआध्यात्मिक,सांस्कृतिकववैज्ञानिकपहलुओंकीचर्चाकरतेहुएकहाकिजिसविशालखालीपनकोहमशिवकहतेहैं,वहसीमाहीनहै,शाश्वतहै।हमारीसंस्कृतिमेंशिवकेलिएबहुततरहकेरूपोंकीकल्पनाकीगईहै।मंगलकारीशंभो,बहुतनादानभोले,वेदों,शास्त्रोंऔरतंत्रोंकेमहानगुरुऔरशिक्षक,दक्षिणमूर्ति,आसानीसेमाफकरदेनेवालेआशुतोष,स्पष्टाकेहीरक्तसेरंगेभैरव,संपूर्णरूपसेस्थिरअचलेश्वर,सबसेजादुईनर्तकनटराजआदि।यानीजीवनकेजितनेपहलूहैं,उतनेहीपहलूशिवकेबताएगएहैं।शिवकीपहचानअच्छेयाबुरेकेरूपमेंनहींकरसकते।वहसबकुछहैं-वहसबसेबदसूरतहैं,वहसबसेखूबसूरतभीहैं।वहसबसेअच्छेऔरसबसेबुरेहैं,वहसबसेअनुशासितभीहैं।उनकीपूजादेवता,दानवऔरदुनियाकेहरतरहकेप्राणीकरतेहैं।लुधियानासेपहुंचीसंतोंकीजुगलजोड़ीनेशिवपुराणकथापरअपनेप्रवचनदिए।एकसप्ताहतकचलनेवालेइसविशालआयोजनकेलिएपहलेहीदिनबड़ीसंख्यामेंश्रद्धालुपहुंचे।पूरागीताभवनपरिसरइनदिनोंबड़ेउत्सवकागवाहबनगयाहै।