विजयादशमी के मौके पर मोहन भागवत ने रोहिंग्या, कश्मीर पर की बात, पढ़ें संबोधन की बड़ी बातें

नागपुर।राष्ट्रीयस्वयंसेवकसंघकेसरसंघचालकमोहनभागवतनेविजयादशमीकेमौकेपरस्थापनादिवसकेकार्यक्रमकोसंबोधितकिया।इसदौरानउन्होंनेमोदीसरकारकीनीतियोंसमेतदेशकईमुद्दोंपरअपनासंबोधनदिया।इसदौरानरोहिंग्यामुद्देपरभागवतनेकहाकिआतंकीगतिविधियोंकीवजहसेरोहिंग्याम्यांमारसेभगाएगए।उन्होंनेकहाकिरोहिंग्याओंपरकोईभीफैसलाराष्ट्रीयसुरक्षाकोध्यानमेंरखलियाजानाचाहिए।भागवतनेकहाकिहमपहलेसेअवैधबंग्लादेशियोंकासामनाकररहेहैं,अबरोहिंग्याभीआगएहैं।

भागवतनेकहाकिसमाजकोराष्ट्रगौरवसेपरिपूर्णपुरूषार्थकेलियेखड़ाकरनाहैतोदेशकेचिंतकोंकोविदेशीदृष्टिकेविचारोंसेमुक्तहोनाहोगा।योगविद्या,पर्यावरणकीहमारीपहलकेकारणअंतर्राष्ट्रीयजगतमेंबढ़तीमान्यताराष्ट्रकेप्रतिगौरवकीअनुभूतिदेताहै।मुंबईस्थितपरेलमेंरेलवेस्टेशनब्रिजपरहुईघटनामेंमारेगएलोगोंकोश्रद्धांजलिदेकरअपनेसंबोधनशुरूकरतेहुएभागवतनेकहाकिपहलीबारदुनियाकाध्यानभारतपरगया।उन्होंनेकहाकिआर्थिकविकासकीदिशामेंहमआगेबढ़े।मोदीसरकारकीतारीफकरतेहुएभागवतनेकहाकिडोकलामजैसीघटनाअंतरराष्ट्रीयजगतमेंभारतकीप्रतिमाकोनयीसम्मानजनकउँचाईप्रदानकरतीहै।भागवतनेकहाकिकश्मीरपरदृढ़ताकास्वागतहैलेकिनलद्दाख,जम्मूसहितसम्पूर्णराज्यमेंभेदभावरहित,पारदर्शीवस्वच्छप्रशासनकीआवश्यकताहै।केरलऔरबंगालकीराजनीतिकहिंसामेंमारेजारहेस्वयंसेवकोंकेमुद्देपरभागवतनेकहाकिसरकारहिंसाकरनेवालोंकेसाथहैऔरइसकेपीछेदेशविरोधीताकतेंहैं।केंद्रकीमोदीसरकारकेआर्थिकमोर्चेपरतारीफकरतेहुएभागवतनेकहाकिआर्थिकविकासकीदिशामेंहमआगेबढ़े।आर्थिकमोर्चेपरहरफैसलेकाअध्ययनहोनाचाहिएइसकेसाथआर्थिकनीतिऐसीहोजिससेसभीवर्गोंकाकल्याणहो।भागवतनेगौरक्षाकेमसलेपरकहाकिगौरक्षाकेनामपरहिंसाठीकनहींहै।गौरक्षाकेनामपरहिंसाकोधर्मसेनाजोड़ें।भागवतनेकहाकदूसरेधर्मसेजुड़ेलोगभीकरतेहैंगौरक्षा,यहसांप्रदायिकताकासवालनहींहै।उन्होंनेकहाकिमुसलमानभीगौरक्षाकरतेहैं।भागवतनेकहाकिमहिलावर्गलेकर''बेटीबचाओ,बेटीपढ़ाओ''जैसीयोजनायँभीचलरहीहैं।स्वच्छताअभियानजैसेउपक्रमोंसेनागरिकोंमेंकर्तव्यभावनाकासंचारकरउनकीसहभागिताभीप्राप्तकीजारहीहै।देशकेअंदरभीअनेकव्यवस्थाओंमेंछोटे,बड़ेसुधारोंकाप्रयास,चिन्तनमेंभीकहींकहींमूलगामीबदलावकेप्रयास,जनमानसमेंनवीनआशावसाथसाथअपेक्षाओंकाभीसृजनकररहेहैं।बहुतकुछहोरहाहै,होगाइसकेसाथजोहोरहाहैउसमें,तथाऔरअधिककुछहोनाचाहियेउसकोलेकरसमाजमेंचर्चाएँचलरहीहै।भागवतनेकहाकिदेशकेसीमाओंकीवदेशकीअंतर्गतसुरक्षाकाव्यवस्थागतदायित्वसेना,अर्धसैनिकवपुलिसबलोंकाहोताहै।स्वतंत्रताकेबादअबतकउसकोनिभानेमेंपूरीजिम्मेवारीकेसाथपरिश्रमवत्यागपूर्वकवेलगेहैं।परंतुउनकोपर्याप्तसाधनसंपन्नकरना,आपसमेंवदेशकेसूचनातंत्रकेसाथतालमेलबिठाना,उनकीतथाउनकेपरिवारोंकेकल्याणकीचिंताकरना,युद्धसाधनोंमेंदेशकीआत्मनिर्भरता,इनबलोंमेंपर्याप्तमात्रामेंनईभरतीवप्रशिक्षणइसमेंशासनकेपहलकीगतिअधिकबढ़ानीपडेगी,इनबलोंसेशासनकोसीधासंवादबढ़ानापडेगा।समाजसेभीउनकेप्रतिअधिकआत्मीयतावसम्मानकीवउनकेपरिवारोंकेदेखभालकीअपेक्षाहै।भ्रष्टाचारपरनियंत्रण,आर्थिकस्थितिमेंद्रुतगतिसेप्रगतितथासमाजकेअंतिमव्यक्तिकोलाभपहुँचानेकेलियेशासनकेद्वाराजनधन,मुद्रा,गैससब्सिडी,कृषिबीमाजैसीअनेकलोककल्याणकारीयोजनाएँवकुछसाहसीनिर्णयकियेगये।परंतुअभीभीएकात्मवसमग्रदृष्टिसेदेशकीसभीविविधताओंवआवश्यकताओंकोध्यानमेंरखकरउद्योग,व्यापार,कृषि,पर्यावरणकोएकसाथचलानेवाली,देशकेबडेउद्योगोंसेलेकरछोटेमध्यमवलघुउद्योगोंकोतक,खुदराव्यापारियों,कृषकोंवखेतीहरमजदूरोंतकसबकेहितोंकाध्यानरखनेवालीसमन्वितनीतिकीआवश्यकताहै।